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Chap 3: पहली बूँद

मेरी समझ से (पाठ से)

Q 1: (क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए-

  1. कविता में नव-जीवन की ले अँगड़ाईकिसके लिए प्रयुक्त हुआ है?

बादल                    बूँद                         अंकुर                     पावस

  1. नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधरमें काली पुतलीहै-

बारिश की बूँदें                                वृद्ध धरती                       नगाड़ा                                  बादल

Q 2: (ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर क्यों चुने?

A 2: हमने पहले प्रश्न का उत्तर ‘अंकुर’ इसलिए चुना क्योंकि जब बारिश की पहली बूँद धरती पर गिरती है, तो मिट्टी के अंदर से नया पौधा (अंकुर) बाहर निकलता है, जो ऐसा लगता है मानो वह नया जीवन पाकर अँगड़ाई ले रहा हो।

हमने दूसरे प्रश्न का उत्तर ‘बादल’ इसलिए चुना क्योंकि कविता में नीले आसमान की तुलना नीली आँखों से की गई है और उस आसमान में तैरते हुए काले बादलों को आँख की काली पुतली बताया गया है।

मिलकर करें मिलान

Q 3: कविता की कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन पंक्तियों में कुछ शब्द रेखांकित हैं। दाहिनी ओर रेखांकित शब्दों के भावार्थ दिए गए हैं। इनका मिलान कीजिए।

कविता की पंक्तियाँ भावार्थ
1. आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर 1. मेघ गर्जना
2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई 2. बादल
3. नीले नयनों सा यह अम्बर, काली पुतली-से ये जलधर। 3. हरी दूब
4. वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई। 4. आकाश

A 3: सही मिलान इस प्रकार है:

कविता की पंक्तियाँ सही भावार्थ
1. आसमान में उड़ता सागर 2. बादल
2. बजा नगाड़े जगा रहे हैं 1. मेघ गर्जना
3. नीले नयनों सा यह अम्बर 4. आकाश
4. वसुंधरा की रोमावलि-सी 3. हरी दूब

पंक्तियों पर चर्चा

Q 4: कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार कक्षा में अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

“आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम पर, बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई।”

“नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधर। करुणा-विगलित अश्रु बहाकर, धरती की चिर-प्यास बुझाई।”

A 4: पहली पंक्तियों का अर्थ: आसमान में बादलों को देखकर ऐसा लगता है जैसे पूरा समुद्र ही बिजली के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा हो। बादलों की गड़गड़ाहट ऐसी लगती है मानो वे नगाड़े (ढोल) बजाकर धरती के नए जीवन और जवानी (तरुणाई) को नींद से जगा रहे हों।

दूसरी पंक्तियों का अर्थ: यह नीला आसमान सुंदर नीली आँखों के समान है और इसमें घिरे हुए काले बादल आँख की काली पुतली जैसे लग रहे हैं। जब बादल दया और करुणा से भरकर बारिश के रूप में आँसू बहाते हैं, तो वे सूखी धरती की बहुत पुरानी प्यास बुझा देते हैं।

सोच-विचार के लिए

Q 5: बारिश की पहली बूँद से धरती का हर्ष कैसे प्रकट होता है?

A 5: बारिश की पहली बूँद जब धरती पर गिरती है, तो धरती के अंदर से नया अंकुर फूट पड़ता है। सूखी धरती की प्यास बुझ जाती है और हरी घास (दूब) खुशी से मुस्कराने लगती है। इस प्रकार धरती अपनी खुशी और हर्ष प्रकट करती है।

Q 6: कविता में आकाश और बादलों को किनके समान बताया गया है?

A 6: कविता में आकाश को ‘नीले नयनों’ (नीली आँखों) के समान और बादलों को आँख की ‘काली पुतली’ के समान बताया गया है। इसके अलावा, बादलों को बिजली के सुनहरे पंख लगाकर आसमान में उड़ते हुए ‘सागर’ (समुद्र) के समान भी बताया गया है।

कविता की रचना

Q 7: ‘आसमान में उड़ता सागर, लगा बिजलियों के स्वर्णिम परकविता की इस पंक्ति का सामान्य अर्थ देखें तो समुद्र का आकाश में उड़ना असंभव होता है। लेकिन जब हम इस पंक्ति का भावार्थ समझते हैं तो अर्थ इस प्रकार निकलता है- समुद्र का जल बिजलियों के सुनहरे पंख लगाकर आकाश में उड़ रहा है। ऐसे प्रयोग न केवल कविता की सुंदरता बढ़ाते हैं बल्कि उसे आनंददायक भी बनाते हैं। इस कविता में ऐसे दृश्यों को पहचानें और उन पर चर्चा करें।

A 7: कविता में आए ऐसे सुंदर और आनंददायक दृश्य निम्नलिखित हैं:

  • धरती के सूखे अधरों पर, गिरी बूँद अमृत-सी आकर” — यहाँ धरती को एक ऐसे व्यक्ति की तरह बताया गया है जिसके होंठ (अधर) प्यास से सूख गए हैं और बारिश की बूँद उन पर अमृत बनकर गिरती है।
  • वसुंधरा की रोमावलि-सी, हरी दूब पुलकी-मुसकाई” — यहाँ हरी घास (दूब) को धरती के शरीर पर उगे हुए रोएँ (रोमावलि) के समान बताया गया है, जो बारिश का पानी पाकर खुशी से मुस्करा रही है।
  • बजा नगाड़े जगा रहे हैं, बादल धरती की तरुणाई” — यहाँ बादलों की गड़गड़ाहट को नगाड़े बजाना बताया गया है, जो धरती को नींद से जगा रहा है।

शब्द एक अर्थ अनेक

Q 8: ‘अंकुर फूट पड़ा धरती से, नव-जीवन की ले अंगड़ाईकविता की इस पंक्ति में फूटनेका अर्थ पौधे का अंकुरण है। फूटका प्रयोग अलग-अलग अर्थों में किया जाता है, जैसे- फूट डालना, घड़ा फूटना आदि। अब फूट शब्द का प्रयोग ऐसे वाक्यों में कीजिए जहाँ इसके भिन्न-भिन्न अर्थ निकलते हों, जैसे- अंग्रेज़ों की नीति थी फूट डालो और राज करो।

A 8: ‘फूटशब्द के विभिन्न अर्थों वाले वाक्य:

  • फूट (टूटना): सोहन के हाथ से छूटकर मिट्टी का घड़ा फूट गया।
  • फूट (मतभेद या झगड़ा होना): दो सच्चे मित्रों के बीच कभी फूट नहीं डालनी चाहिए।
  • फूट-फूट कर (बहुत तेज़ रोना): अपना खोया हुआ खिलौना न मिलने पर बच्चा फूट-फूट कर रोने लगा।
  • फूट पड़ना (अंकुर निकलना): बारिश होते ही बीज से नया अंकुर फूट पड़ा।

अनेक शब्दों के लिए एक शब्द

Q 9: ‘नीले नयनों-सा यह अंबर, काली पुतली-से ये जलधरकविता की इस पंक्ति में जलधरशब्द आया है। जलधरदो शब्दों से बना है, जल और धर। इस प्रकार जलधर का शाब्दिक अर्थ हुआ जल को धारण करने वाला। बादल और समुद्र; दोनों ही जल धारण करते हैं। इसलिए दोनों जलधर हैं। वाक्य के संदर्भ या प्रयोग से हम जान सकेंगे कि जलधर का अर्थ समुद्र है या बादल। शब्दकोश या इंटरनेट की सहायता से धरसे मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ ढूँढ़कर लिखिए।

A 9: ‘धर‘ (धारण करने वाला) से मिलकर बने कुछ शब्द और उनके अर्थ:

  • भूधर / पर्वतधर: पृथ्वी को धारण करने वाला (पहाड़ या पर्वत)।
  • गिरिधर: पर्वत को अपनी उँगली पर धारण करने वाला (भगवान श्रीकृष्ण)।
  • मुरलीधर: मुरली (बाँसुरी) को धारण करने वाला (भगवान श्रीकृष्ण)।
  • चक्रधर: सुदर्शन चक्र को धारण करने वाला (भगवान विष्णु)।
  • विषधर: विष (ज़हर) को धारण करने वाला (साँप)।
  • गदाधर: गदा को धारण करने वाला (हनुमान जी या भीम)।

शब्द पहेली

Q 10: दिए गए शब्द-जाल में प्रश्नों के उत्तर खोजें-

  • (क) एक प्रकार का वाद्य यंत्र — नगाड़ा
  • (ख) आँख के लिए एक अन्य शब्द — नयन
  • (ग) जल को धारण करने वाला — जलधर
  • (घ) एक प्रकार की घास — दूब
  • (ङ) आँसू का समानार्थी — अश्रु
  • (च) आसमान का समानार्थी शब्द — अंबर

आपकी बात (पाठ से आगे)

Q 11: बारिश को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव भिन्न होता है। बारिश आने पर आपको कैसा लगता है? बताइए।

A 11: बारिश आने पर मुझे बहुत अच्छा और आनंददायक लगता है। जब आसमान में काले बादल घिर आते हैं और ठंडी-ठंडी हवा चलने लगती है, तो मेरा मन खुशी से झूम उठता है। बारिश की बूँदों में भीगना, पानी के गड्ढों में काग़ज़ की नाव चलाना और घर में गरमा-गरम पकौड़े खाना मुझे बहुत पसंद है। चारों तरफ़ पेड़-पौधों को हरा-भरा देखकर मन को बहुत शांति मिलती है।

Q 12: आपको कौन-सी ऋतु सबसे अधिक प्रिय है और क्यों? बताइए।

A 12: मुझे वर्षा ऋतु (मानसून) सबसे अधिक प्रिय है। इस ऋतु में भीषण गर्मी से राहत मिलती है और मौसम बहुत सुहावना हो जाता है। सूखे पेड़-पौधे फिर से हरे-भरे हो जाते हैं और कभी-कभी आसमान में सात रंगों वाला सुंदर इंद्रधनुष भी देखने को मिलता है। बारिश के मौसम में मोर को नाचते हुए देखना और दोस्तों के साथ खेलना मुझे बहुत अच्छा लगता है।

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