मेरी समझ से (पाठ से)
Q 1: (क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए- (1) सुलतान के छीने जाने का बाबा भारती पर क्या प्रभाव हुआ? • बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। • बाबा भारती ने गरीबों की सहायता करना बंद कर दिया। • बाबा भारती ने द्वार बंद करना छोड़ दिया। • बाबा भारती असावधान हो गए।
(2) “बाबा भारती भी मनुष्य ही थे।” इस कथन के समर्थन में लेखक ने कौन-सा तर्क दिया है? • बाबा भारती ने डाकू को घमंड से घोड़ा दिखाया। • बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। • बाबा भारती को घोड़े से अत्यधिक लगाव और मोह था। • बाबा भारती हर पल घोड़े की रखवाली करते रहते थे।
A 1: (1) बाबा भारती के मन से चोरी का डर समाप्त हो गया। (*) (क्योंकि अब उनके पास चुराने के लिए घोड़ा ही नहीं बचा था।) (2) बाबा भारती घोड़े की प्रशंसा दूसरों से सुनने के लिए व्याकुल थे। (*) (क्योंकि आम इंसानों की तरह अपनी चीज़ की तारीफ़ सुनकर उनका मन भी अधीर हो गया था।)
Q 2: (ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
A 2:
- पहले प्रश्न के लिए: हमने यह उत्तर इसलिए चुना क्योंकि जब खड्गसिंह उनका घोड़ा ले गया, तो बाबा भारती के पास खोने के लिए कोई कीमती वस्तु नहीं बची थी। इसलिए वे रात को मंदिर का फाटक खुला छोड़कर बेफिक्र सोने लगे और उनके मन से चोरी का डर हमेशा के लिए समाप्त हो गया।
- दूसरे प्रश्न के लिए: हमने यह उत्तर इसलिए चुना क्योंकि साधु-संत घमंड और दिखावे से दूर रहते हैं। लेकिन बाबा भारती भी एक इंसान थे, इसलिए जब खड्गसिंह ने उनके घोड़े की चाल देखने की इच्छा जताई, तो एक आम मनुष्य की तरह वे भी अपनी चीज़ की तारीफ़ सुनने के लिए अधीर (बेचैन) हो गए और उसे घोड़ा दौड़ाकर दिखाने लगे।
शीर्षक
Q 3: (क) आपने अभी जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम सुदर्शन ने ‘हार की जीत’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी को यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।
A 3: लेखक ने इस कहानी का नाम ‘हार की जीत‘ इसलिए रखा क्योंकि खड्गसिंह ने बाबा भारती को धोखे से हराकर (उनका घोड़ा छीनकर) बाज़ी जीत ली थी। लेकिन जब बाबा भारती ने उससे कहा कि वह इस धोखे की बात किसी को न बताए, वरना लोग गरीबों पर भरोसा करना छोड़ देंगे, तो बाबा के इन महान विचारों ने डाकू के दिल को बदल दिया। अंत में डाकू अपनी जीत हार गया और घोड़ा वापस दे गया। इस प्रकार बाबा भारती अपना घोड़ा हारकर भी मानवता और भलाई की जीत गए।
Q 4: (ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।
A 4: यदि मुझे इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो मैं इसे “बाबा भारती का पवित्र भाव” या “डाकू का हृदय परिवर्तन” नाम दूँगा। मैंने यह नाम इसलिए सोचा क्योंकि बाबा भारती के पवित्र और अच्छे विचारों के कारण ही एक निर्दयी डाकू का दिल बदल गया और उसने बुराई का रास्ता छोड़कर भलाई का काम किया।
Q 5: (ग) बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से कौन-सा वचन लिया?
A 5: बाबा भारती ने डाकू खड्गसिंह से यह वचन लिया कि वह इस घटना (धोखे से घोड़ा छीनने की बात) को किसी के सामने प्रकट न करे (किसी को न बताए)। उन्होंने कहा कि यदि लोगों को इस धोखे का पता चल गया, तो वे कभी किसी गरीब और लाचार व्यक्ति पर विश्वास नहीं करेंगे और उनकी मदद नहीं करेंगे।
पंक्तियों पर चर्चा
Q 6: कहानी में से चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार लिखिए- 1. “भगवत-भजन से जो समय बचता, वह घोड़े को अर्पण हो जाता।” 2. “बाबा ने घोड़ा दिखाया घमंड से, खड्गसिंह ने घोड़ा देखा आश्चर्य से।” 3. “वह डाकू था और जो वस्तु उसे पसंद आ जाए उस पर अपना अधिकार समझता था।” 4. “बाबा भारती ने निकट जाकर उसकी ओर ऐसी आँखों से देखा जैसे बकरा कसाई की ओर देखता है और कहा, यह घोड़ा तुम्हारा हो चुका है।” 5. “उनके पाँव अस्तबल की ओर मुड़े। परंतु फाटक पर पहुँचकर उनको अपनी भूल प्रतीत हुई।”
A 6:
- पहले वाक्य का अर्थ: बाबा भारती एक साधु थे और भगवान की पूजा-पाठ करते थे। पूजा करने के बाद उनके पास जो भी समय बचता था, वह उस पूरे समय में अपने प्यारे घोड़े सुलतान की देखभाल करते, उसे दाना खिलाते और उससे प्यार करते थे।
- दूसरे वाक्य का अर्थ: बाबा भारती को अपने सुंदर और बलवान घोड़े पर बहुत गर्व (घमंड) था, इसलिए उन्होंने उसे बहुत फख्र से दिखाया। वहीं डाकू खड्गसिंह ने जब इतना सुंदर और तेज़ घोड़ा देखा, तो वह हैरान (आश्चर्यचकित) रह गया क्योंकि उसने ऐसा घोड़ा पहले कभी नहीं देखा था।
- तीसरे वाक्य का अर्थ: खड्गसिंह एक बहुत ताकतवर और निर्दयी डाकू था। उसकी सोच ऐसी थी कि दुनिया में जो भी अच्छी चीज़ उसे पसंद आ जाए, उसे वह अपनी ताकत के बल पर छीन लेता था और उस पर अपना हक समझता था।
- चौथे वाक्य का अर्थ: जब खड्गसिंह ने धोखे से घोड़ा छीन लिया, तो बाबा भारती बेबस और लाचार हो गए। उन्होंने खड्गसिंह की तरफ इतने दुख और बेबसी से देखा जैसे कोई बकरा मरने से पहले कसाई को देखता है। उन्होंने मान लिया कि अब यह घोड़ा खड्गसिंह का हो गया है।
- पाँचवें वाक्य का अर्थ: बाबा भारती को रोज़ सुबह उठकर अस्तबल में अपने घोड़े के पास जाने की आदत थी। उस दिन भी आदत के कारण उनके कदम अस्तबल की तरफ चल पड़े। लेकिन अस्तबल के दरवाज़े पर पहुँचकर उन्हें याद आया कि अब तो सुलतान वहाँ है ही नहीं, उसे तो डाकू ले गया है।
सोच-विचार के लिए
Q 7: कहानी को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित पंक्ति के विषय में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “दोनों के आँसुओं का उस भूमि की मिट्टी पर परस्पर मेल हो गया।” (क) किस-किस के आँसुओं का मेल हो गया था? (ख) दोनों के आँसुओं में क्या अंतर था?
A 7: (क) उस भूमि की मिट्टी पर डाकू खड्गसिंह और बाबा भारती, दोनों के आँसुओं का मेल हो गया था। (रात को घोड़ा बाँधते समय खड्गसिंह रोया था और सुबह घोड़े से मिलकर बाबा भारती रोए थे।) (ख) दोनों के आँसुओं में बहुत बड़ा अंतर था:
- खड्गसिंह के आँसू: पश्चाताप (पछतावे) के आँसू थे। उसे अपनी गलती और धोखेबाज़ी पर बहुत दुख और पछतावा हो रहा था।
- बाबा भारती के आँसू: आश्चर्य (हैरानी), प्रसन्नता (खुशी) और प्रेम के आँसू थे। अपने बिछड़े हुए प्यारे घोड़े को वापस पाकर वे खुशी से रो रहे थे।
कहानी की रचना
Q 10: (क) इस कहानी की कौन-कौन सी बातें आपको पसंद आई? आपस में चर्चा कीजिए।
A 10: मुझे इस कहानी की निम्नलिखित बातें बहुत पसंद आईं:
- बाबा भारती और उनके घोड़े सुलतान के बीच का अटूट और सच्चा प्रेम।
- बाबा भारती की दयालुता, जिन्होंने एक अनजान अपाहिज व्यक्ति की मदद करने के लिए अपना घोड़ा रोक लिया।
- बाबा भारती के ऊँचे विचार कि अपनी हार के बाद भी उन्हें खुद से ज़्यादा गरीबों की चिंता थी।
- कहानी का अंत, जिसमें एक बुरे डाकू का दिल बदल जाता है और वह अपनी गलती सुधारकर घोड़ा वापस कर देता है।
Q 11: (ख) कोई भी कहानी पाठक को तभी पसंद आती है जब उसे अच्छी तरह लिखा गया हो। लेखक कहानी को अच्छी तरह लिखने के लिए अनेक बातों का ध्यान रखते हैं, जैसे- शब्द, वाक्य, संवाद आदि। इस कहानी में आए संवादों के विषय में अपने विचार लिखें।
A 11: इस कहानी के संवाद (बातचीत) बहुत ही सरल, छोटे और प्रभावशाली हैं। संवादों को पढ़कर पात्रों के मन के भाव बहुत अच्छे से समझ आते हैं।
- जब खड्गसिंह कहता है— “बाबाजी, मैं यह घोड़ा आपके पास न रहने दूँगा”, तो उसकी ताकत और घमंड का पता चलता है।
- जब बाबा भारती कहते हैं— “मेरी प्रार्थना केवल यह है कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना”, तो उनकी महानता और गरीबों के प्रति चिंता दिखाई देती है। कहानी के संवाद हमें बाँधे रखते हैं और कहानी को बहुत रोचक बनाते हैं।
मुहावरे कहानी से
Q 12: (क) कहानी से चुनकर कुछ मुहावरे नीचे दिए गए हैं- लहू होना, हृदय पर साँप लोटना, फूले न समाना, मुँह मोड़ लेना, मुख खिल जाना, न्योछावर कर देना। कहानी में इन्हें खोजकर इनका प्रयोग समझिए।
A 12: कहानी में मुहावरों का प्रयोग:
- हृदय पर साँप लोटना (बहुत जलना या ईर्ष्या होना): सुलतान की चाल को देखकर खड्गसिंह के हृदय पर साँप लोट गया।
- फूले न समाना (बहुत अधिक खुश होना): बाबा भारती घोड़े के शरीर और रंग को देखकर मन में फूले न समाते थे।
- मुँह मोड़ लेना (कोई संबंध न रखना या ध्यान न देना): बाबा भारती ने सुलतान की ओर से इस तरह मुँह मोड़ लिया जैसे उनका उससे कभी कोई संबंध ही न रहा हो।
- मुख खिल जाना (चेहरे पर खुशी आ जाना): सुलतान को देखकर बाबा भारती का मुख फूल की नाईं खिल जाता था।
Q 13: (ख) अब इनका प्रयोग करते हुए अपने मन से नए वाक्य बनाइए।
A 13: मुहावरों से नए वाक्य:
- हृदय पर साँप लोटना: रोहन की नई और सुंदर साइकिल देखकर उसके दोस्त के हृदय पर साँप लोट गया।
- फूले न समाना: कक्षा में प्रथम आने की खबर सुनकर मैं खुशी से फूला न समाया।
- मुँह मोड़ लेना: हमें कभी भी मुश्किल समय में अपने दोस्तों से मुँह नहीं मोड़ना चाहिए।
- मुख खिल जाना: शाम को पिताजी को खिलौने लाते देखकर बच्चे का मुख खिल गया।
- न्योछावर कर देना (सब कुछ अर्पण कर देना): हमारे वीर सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया।
कैसे-कैसे पात्र (विशेषण)
Q 14: इस कहानी में तीन मुख्य पात्र हैं- बाबा भारती, डाकू खड्गसिंह और सुलतान घोड़ा। इनके गुणों को बताने वाले शब्दों से दिए गए शब्द-चित्रों को पूरा कीजिए- (1) बाबा भारती (एक उदाहरण: दयालु) (2) डाकू खड्गसिंह (एक उदाहरण: बाहुबली) (3) सुलतान घोड़ा (एक उदाहरण: सुंदर)
A 14: (1) बाबा भारती की विशेषता बताने वाले शब्द: दयालु, पवित्र, भजन-भक्त, परोपकारी, सरल। (2) डाकू खड्गसिंह की विशेषता बताने वाले शब्द: बाहुबली, प्रसिद्ध डाकू, निर्दयी / बेरहम, चालबाज़ / धोखेबाज़, ताकतवर। (3) सुलतान घोड़ा की विशेषता बताने वाले शब्द: सुंदर, बलवान, बाँका, तेज़ (हवा से बातें करने वाला), आकर्षक / मनमोहक।
पाठ से आगे
मन के भाव
Q 16: (क) कहानी में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। बताइए, कहानी में कौन, कब, ऐसा अनुभव कर रहा था- • चकित • अधीर • डर • प्रसन्नता • करुणा • निराशा
A 16:
- चकित (हैरान): डाकू खड्गसिंह तब चकित अनुभव कर रहा था जब उसने सुलतान जैसा सुंदर और बाँका घोड़ा पहली बार देखा।
- अधीर (बेचैन): खड्गसिंह सुलतान की चाल देखने के लिए अधीर था, और बाबा भारती अपनी चीज़ की प्रशंसा दूसरे के मुँह से सुनने के लिए अधीर थे।
- डर: जब खड्गसिंह ने घोड़ा छीन लेने की धमकी दी, तब बाबा भारती डर अनुभव कर रहे थे और रात-रात भर अस्तबल का पहरा देते थे।
- प्रसन्नता (खुशी): बाबा भारती अपने घोड़े सुलतान को देखकर और रोज़ शाम को उस पर बैठकर घूमने जाते समय प्रसन्नता अनुभव करते थे। (सुबह घोड़ा वापस पाकर भी उन्हें प्रसन्नता हुई।)
- करुणा (दया): रास्ते में कराहते हुए अपाहिज (खड्गसिंह) की आवाज़ सुनकर बाबा भारती के मन में करुणा का भाव आया था।
- निराशा: जब सुबह बाबा भारती अस्तबल के फाटक पर पहुँचे और उन्हें याद आया कि घोड़ा तो डाकू ले गया है, तब वे घोर निराशा अनुभव कर रहे थे।
Q 17: (ख) आप उपर्युक्त भावों को कब-कब अनुभव करते हैं? लिखिए। (संकेत- जैसे गली में किसी कुत्ते को देखकर डर या प्रसन्नता या करुणा आदि का अनुभव करना)
A 17: मेरे अनुभव:
- चकित: जब मैंने पहली बार जादूगर को हवा में कबूतर उड़ाते हुए देखा, तो मैं चकित रह गया।
- अधीर: जब मेरा जन्मदिन आने वाला होता है, तो मैं अपने उपहार (गिफ्ट) देखने के लिए बहुत अधीर हो जाता हूँ।
- डर: जब रात को बिजली चली जाती है और बहुत तेज़ गड़गड़ाहट के साथ बारिश होती है, तो मुझे डर लगता है।
- प्रसन्नता: जब मैं स्कूल की परीक्षा में अच्छे अंकों से पास होता हूँ और माता-पिता मेरी तारीफ़ करते हैं, तो मुझे बहुत प्रसन्नता होती है।
- करुणा: जब मैं ठंड में किसी छोटे पिल्ले (कुत्ते के बच्चे) को काँपते हुए देखता हूँ, तो मुझे उस पर बहुत करुणा आती है।
- निराशा: जब बारिश के कारण शाम को पार्क में खेलने नहीं जा पाता हूँ, तो मुझे निराशा होती है।