मेरी समझ से (पृष्ठ 85)
प्रश्न (क): नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए।
प्रश्न (1): इस कविता में वर्षा ऋतु का कौन-सा भाव मुख्य रूप से उभर कर आता है?
-
दुख और निराशा
-
आनंद और प्रसन्नता
-
भय और चिंता
-
क्रोध और विरोध उत्तर: आनंद और प्रसन्नता (★)
प्रश्न (2): “नभ में छटा अनूठी” और “घनघोर छा रही है” पंक्तियों का उपयोग वर्षा ऋतु के किस दृश्य को व्यक्त करने के लिए किया गया है?
-
बादलों के घिरने का दृश्य
-
बिजली के गिरने का दृश्य
-
ठंडी हवा के बहने का दृश्य
-
आमोद छा जाने का दृश्य उत्तर: बादलों के घिरने का दृश्य (★)
प्रश्न (3): कविता में वर्षा को ‘अनोखी बहार’ कहा गया है क्योंकि-
-
कवि वर्षा को विशेष ऋतु मानता है।
-
वर्षा में सभी जीव-जंतु सक्रिय हो जाते हैं।
-
वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है।
-
वर्षा एक अद्भुत अनोखी प्राकृतिक घटना है। उत्तर: वर्षा सबके लिए सुख और संतोष लाती है। (★)
प्रश्न (4): “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” इस पंक्ति का क्या अर्थ है?
-
प्रकृति में सभी जीव-जंतु एक-दूसरे पर निर्भर हैं।
-
वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है।
-
बादलों की सुंदरता से ही पृथ्वी की शोभा बढ़ती है।
-
हमें वर्षा ऋतु से जगत की भलाई की प्रेरणा लेनी चाहिए। उत्तर: वर्षा पृथ्वी पर हरियाली और जीवन का मुख्य स्रोत है। (★)
प्रश्न (ख): हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें? उत्तर: मैंने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि पूरी कविता में बारिश आने पर प्रकृति, जीव-जंतुओं और इंसानों की खुशी का वर्णन किया गया है। बारिश से ही सब जगह सुंदरता, हरियाली और नया जीवन आता है।
पंक्तियों पर चर्चा (पृष्ठ 86)
प्रश्न: पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए-
प्रश्न (क): “फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते, करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।” उत्तर: इन पंक्तियों का अर्थ है कि पपीहे (एक प्रकार का पक्षी) खुशी से उड़ रहे हैं और बारिश की बूँदों से अपनी गरमी की जलन मिटा रहे हैं। जंगल में सारे मोर बारिश की खुशी में अपने पंख फैलाकर नाच रहे हैं।
प्रश्न (ख): “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर, गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” उत्तर: इन पंक्तियों का अर्थ है कि हंसों का झुंड एक बहुत ही सुंदर लाइन (कतार) बनाकर चल रहा है। बारिश से खुश होकर किसान भी अपने खेतों में काम करते हुए बहुत ही सुंदर और मन को मोह लेने वाले गीत गा रहे हैं।
मिलकर करें मिलान (पृष्ठ 86)
प्रश्न: कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए –
उत्तर (सही मिलान):
-
पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं -> 2. वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं।
-
चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब -> 6. ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं।
-
तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते -> 1. वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं।
-
फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते -> 3. वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं।
-
खिलता गुलाब कैसा सौरभ उड़ा रहा है -> 5. वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं।
-
चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर -> 4. हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं।
सोच-विचार के लिए (पृष्ठ 86-87)
प्रश्न (क): कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं और क्यों? उत्तर: कविता में मालिनें (बगीचे में काम करने वाली), मेंढक और किसान गीत गा रहे हैं। वे सभी बारिश आने, मौसम ठंडा होने और प्रकृति की सुंदरता को देखकर खुशी से गीत गा रहे हैं।
प्रश्न (ख): “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” और “तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते”। दी गई दोनों पंक्तियों को ध्यान से पढ़िए। इनमें वर्षा के दो अलग-अलग दृश्य दर्शाए गए हैं। इन दोनों में क्या कोई अंतर है? क्या कोई संबंध है? अपने विचार लिखिए। उत्तर: हाँ, दोनों में अंतर है। पहली पंक्ति में आसमान का थोड़ा डरावना दृश्य (बिजली चमकना और गरजना) है, जबकि दूसरी पंक्ति में धरती पर पानी के जीवों की खुशी का दृश्य है। दोनों में संबंध यह है कि बादलों के गरजने और बारिश होने से ही तालाब पानी से भरते हैं, जिससे जलचर खुश होते हैं।
प्रश्न (ग): कविता में मुख्य रूप से कौन-सी बात कही गई है? उसे पहचानिए, समझिए और अपने शब्दों में लिखिए। उत्तर: कविता में मुख्य रूप से वर्षा ऋतु की सुंदरता और उससे मिलने वाली खुशियों की बात कही गई है। यह बताया गया है कि बारिश आने पर प्रकृति, पक्षी, जानवर और इंसान कैसे खुशी से भर जाते हैं।
प्रश्न (घ): “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” इस पंक्ति को पढ़कर एक खिलते हुए गुलाब का सुंदर चित्र मस्तिष्क में बन जाता है। इस पंक्ति का उद्देश्य केवल गुलाब की सुंदरता को बताना है या इसका कोई अन्य अर्थ भी हो सकता है? उत्तर: इस पंक्ति का उद्देश्य सिर्फ गुलाब की सुंदरता बताना ही नहीं है, बल्कि यह भी बताना है कि बारिश के पानी से पूरी प्रकृति खिल उठी है और चारों तरफ ताजगी और मीठी महक (खुशबू) फैल गई है।
प्रश्न (ङ): कविता में से उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें सकारात्मक गतिविधियों का उल्लेख किया गया है, जैसे- ‘गीत गाना’, ‘नृत्य करना’ और ‘सुगंध फैलाना’। इन गतिविधियों के आधार पर बताइए कि इस कविता का शीर्षक ‘वर्षा-बहार’ क्यों रखा गया है? उत्तर: पंक्तियाँ: “बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” , “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे” , “खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है” । इन सकारात्मक बातों से पता चलता है कि बारिश अपने साथ ढेर सारी खुशियाँ और बहार (त्योहार जैसा माहौल) लेकर आई है। इसीलिए इसका नाम ‘वर्षा-बहार’ बिल्कुल सही है।
अनुमान और कल्पना से (पृष्ठ 87)
प्रश्न (क): “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” कविता में कहा गया है कि वर्षा पर सारे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है? उत्तर: अगर बारिश नहीं होगी, तो भयंकर सूखा पड़ जाएगा। किसानों की फसलें सूख जाएँगी। पशु-पक्षियों और इंसानों को पीने के लिए पानी नहीं मिलेगा। धरती की सारी हरियाली और सुंदरता खत्म हो जाएगी।
प्रश्न (ख): “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (संकेत – आप सकारात्मक और नकारात्मक यानी अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के प्रभावों के बारे में सोच सकते हैं।)
उत्तर: * अच्छा प्रभाव: बादल गरजने से किसानों और लोगों को पता चल जाता है कि बारिश होने वाली है, जिससे वे खुश हो जाते हैं।
-
बुरा प्रभाव: तेज बिजली गिरने से पेड़ों, घरों और जान-माल का नुकसान हो सकता है। तेज आवाज़ से लोग और जानवर डर सकते हैं।
प्रश्न (ग): “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे”- इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे? उत्तर: बारिश आने पर पक्षी खुशी से चहचहाने लगते हैं। मोर अपने सुंदर पंख फैलाकर नाचने लगते हैं। मेंढक पानी में कूदकर ‘टर्र-टर्र’ करके गाना गाते हैं। सब जीव गर्मी से राहत पाकर खुश हो जाते हैं।
आपकी रचनाएँ (पृष्ठ 87)
प्रश्न (क): कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए। उत्तर: आसमान में काले-काले बादलों को देखकर जंगल में मोरों ने अपने रंग-बिरंगे पंख फैला लिए हैं और वे गोल-गोल घूमकर नाच रहे हैं। वहीं, पानी से भरे तालाब के किनारे मेंढक खुशी से उछल रहे हैं और ‘टर्र-टर्र’ की आवाज़ निकाल रहे हैं, जैसे वे कोई बहुत प्यारा गाना गा रहे हों।
शब्द से जुड़े शब्द (पृष्ठ 88)
प्रश्न: अपने समूह में चर्चा करके ‘वर्षा’ से जुड़े शब्द नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए- उत्तर: बादल, छाता, कागज़ की नाव, बिजली, हरियाली, मेंढक, कीचड़, इंद्रधनुष, रिमझिम, पानी।
कविता की रचना (पृष्ठ 88)
प्रश्न: इस कविता में ऐसी ही अन्य विशेषताएँ छिपी हैं, जैसे- कविता की कुछ पंक्तियाँ सरल वाक्य के रूप में ही हैं तो कुछ में वाक्य संरचना सरल नहीं है। अपने समूह के साथ मिलकर इस कविता की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। उत्तर: 1. कविता में तुकबंदी (Rhyming words) का बहुत अच्छा प्रयोग हुआ है (जैसे: छा रही है – लुभा रही है, रहे हैं – बहे हैं)। 2. कविता में प्रकृति के दृश्यों का बहुत ही सुंदर और सजीव वर्णन किया गया है। 3. कविता में इंसानों (किसान, मालिन) और जीवों (हंस, मोर, मेंढक) दोनों को एक साथ खुश दिखाया गया है।
कविता का सौंदर्य (पृष्ठ 89)
प्रश्न (क): नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए। जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं उन पर घेरा बनाइए।
उत्तर:
-
वर्षा-बहार सब के, मन को लुभा रही है (बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि) -> वर्षा (सही शब्द)
-
नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है (आकाश, गगन, अंबर, व्योम) -> नभ (सही शब्द)
-
बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं (मेघ, जलधर, घन, जलद) -> बादल (सही शब्द)
-
पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं (जल, नीर, सलिल, तोय) -> पानी (सही शब्द)
प्रश्न (ख): अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों? उत्तर: हमें मूल कविता के शब्द (वर्षा, नभ, बादल, पानी) ही सबसे ज्यादा जँच रहे हैं क्योंकि ये शब्द बोलने में आसान हैं और कविता की लय (Music) को अच्छा बना रहे हैं।
विशेषण (पृष्ठ 89-90)
प्रश्न (क): नीचे दी गई पंक्तियों में विशेषण और विशेष्य शब्दों की पहचान करके लिखिए- उत्तर:
-
नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है -> विशेषण: अनूठी, विशेष्य: छटा
-
चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर -> विशेषण: सुंदर, विशेष्य: कतार
-
मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे -> विशेषण: प्यारे, विशेष्य: सुगीत
-
चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब -> विशेषण: ठंडी, विशेष्य: हवा
प्रश्न (ख): नीचे दिए गए विशेष्यों के लिए अपने मन से विशेषण सोचकर लिखिए- उत्तर:
-
वर्षा -> रिमझिम वर्षा
-
पानी -> ठंडा पानी
-
बादल -> काले बादल
-
डालियाँ -> हरी डालियाँ
-
गुलाब -> लाल गुलाब
ऋतु और शब्द (पृष्ठ 90)
प्रश्न: भारत में मुख्य रूप से छह ऋतुएँ क्रम से आती-जाती हैं। लोग इन ऋतुओं में कुछ विशेष शब्दों का उपयोग करते हैं। नीचे दिए गए शब्दों को पढ़कर तालिका में उपयुक्त स्थान पर लिखिए- (धूप, लू, बयार, हिमपात, वृष्टि, पाला, ताप, जाड़ा, झड़ी, ठिठुरन, धुंध, कोहरा, आँधी, उमस, हरियाली, बहार, तपन, जेठ, सावन, रिमझिम, शीतलता, ओस, ठंडक, बादल फटना, कड़ाके की ठंड)
उत्तर:
-
वसंत ऋतु: बयार, हरियाली, बहार।
-
ग्रीष्म ऋतु: धूप, लू, ताप, आँधी, तपन, जेठ।
-
वर्षा ऋतु: वृष्टि, झड़ी, उमस, सावन, रिमझिम, बादल फटना।
-
शरद ऋतु: शीतलता, ओस, ठंडक।
-
हेमंत ऋतु: जाड़ा, ठिठुरन, धुंध।
-
शिशिर ऋतु: हिमपात, पाला, कोहरा, कड़ाके की ठंड।
आपकी बात – पाठ से आगे (पृष्ठ 91)
प्रश्न (क): वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं? उत्तर: वर्षा के समय हमारे आस-पास के पेड़-पौधे हरे-भरे हो जाते हैं। मिट्टी से सोंधी-सोंधी खुशबू आती है और मौसम बहुत सुहावना और ठंडा हो जाता है।
प्रश्न (ख): बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए। उत्तर: बारिश में स्कूल जाते समय हम रंग-बिरंगे रेनकोट पहनते हैं। एक बार बारिश में स्कूल जाते समय हवा से मेरा छाता उल्टा हो गया था, जिसे देखकर मेरे सारे दोस्त बहुत हँसे थे।
प्रश्न (ग): वर्षा ऋतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं? उत्तर: मुझे बारिश में कागज़ की नाव बनाकर पानी में तैराना और घर पर पकौड़े खाना बहुत अच्छा लगता है। लेकिन बारिश की वजह से मैं शाम को दोस्तों के साथ पार्क में खेलने नहीं जा पाता हूँ।
प्रश्न (घ): बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं? उत्तर: बारिश के समय पक्षी पेड़ों के पत्तों के नीचे छिप जाते हैं। कुत्ते और गाय टीन शेड या लोगों के घरों के बाहर खड़े हो जाते हैं। बारिश में उन्हें खाना ढूँढ़ने में बहुत परेशानी होती है और भीगने से उन्हें ठंड भी लग जाती है।
वर्षा के दृश्य (पृष्ठ 92)
प्रश्न (क): वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है। जैसे आकाश में इंद्रधनुष। उत्तर:
-
आसमान में सतरंगी इंद्रधनुष निकलना।
-
बच्चों का पानी में कागज़ की नाव चलाना।
-
रंग-बिरंगे छाते लेकर लोगों का बाहर निकलना।
प्रश्न (ख): वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती है? क्यों? पता कीजिए। उत्तर: हमें आकाश में बिजली की चमक पहले दिखाई देती है और बादलों के कड़कने की आवाज़ थोड़ी देर बाद सुनाई देती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि प्रकाश (रोशनी) की गति आवाज़ (ध्वनि) की गति से बहुत ज्यादा तेज़ होती है।
प्रश्न (ग): आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए? उत्तर: वर्षा से पहले पेड़ों के पत्ते सूखे और धूल से भरे हुए होते हैं। लेकिन वर्षा के बाद बारिश के पानी से सारे पत्ते धुल कर बिल्कुल साफ़, हरे और चमकदार दिखाई देते हैं।
प्रश्न (घ): “चलते हैं हंस कहीं पर बाँधे कतार सुंदर” – कविता में हंसों के कतार में अर्थात पंक्तिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत- चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि) उत्तर: मैंने चींटियों को दीवार पर खाने की तलाश में लाइन (कतार) बनाकर चलते हुए देखा है। इसके अलावा, स्कूल में प्रार्थना के समय बच्चों को कतार में खड़े होते देखा है।
आज की पहेली (पृष्ठ 94)
प्रश्न: भारत की विभिन्न ऋतुओं से जुड़ी कुछ पहेलियाँ पढ़िए और इन्हें बूझिए-
पहेली 1: जाने कैसा मौसम आया, सूरज ने सबको झुलसाया। आम पकें तो रस ढलके, समय कौन-सा ये झलके? उत्तर: ग्रीष्म ऋतु (गरमी)
पहेली 2: पानी बरसे, बादल गरजे, धरती का हर कोना हरसे। नदियाँ नाले भरे हर ओर, बूझो किसका है ये जोर? उत्तर: वर्षा ऋतु (बारिश)
पहेली 3: हवा में ठंडक बढ़ती जाए, धूप सुहानी सबको भाए। नई फसल खेतों में लाए, बूझो कौन-सा मौसम आए? उत्तर: हेमंत ऋतु / शरद ऋतु
पहेली 4: बर्फ गिरे, सर्दी बढ़ जाए, ऊनी कपड़े सबको भाए। धुंध की चादर लाए रात, बूझो किस ऋतु की बात? उत्तर: शिशिर ऋतु (सर्दी)
पहेली 5: फूल खिले, हर पक्षी गाए, चारों ओर हरियाली छाए। बागों में खुशबू छा जाए, बूझो ऋतु ये क्या कहलाए? उत्तर: वसंत ऋतु
पहेली 6: पत्ता-पत्ता गिरता जाए, सूनी डाली बहुत सताए। पेड़ करें खुद को तैयार, कौन-सी ऋतु का है ये सार? उत्तर: पतझड़ ऋतु
साझी समझ (पृष्ठ 95)
प्रश्न: ‘ग्रीष्म’ कविता पर अपने साथियों के साथ विचार-विमर्श कीजिए। उत्तर: ‘ग्रीष्म’ कविता में गर्मी के मौसम की परेशानियों का वर्णन किया गया है। इसमें बताया गया है कि सूरज की तेज धूप से धरती जलने लगती है । इंसान, जानवर और पक्षी सभी गर्मी से बेहाल हो जाते हैं । नदी, नाले और तालाब सूख जाते हैं जिससे सब जगह चिंता और परेशानी छा जाती है ।