मेरी समझ से (पृष्ठ 74-75)
(क) पाठ के आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए।
प्रश्न 1: “बिना बिचारे” काम करने के क्या परिणाम होते हैं?
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दूसरों से प्रशंसा मिलती है।
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मन में शांति बनी रहती है।
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अपना काम बिगड़ जाता है।
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खान-पान सम्मान मिलता है। उत्तर: अपना काम बिगड़ जाता है। (★)
प्रश्न 2: “चित्त में चैन” न पा सकने का मुख्य कारण क्या है?
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प्रयास करने पर भी टाला न जा सकने वाला दुख
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बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता
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खान-पान, सम्मान और राग-रंग का अभाव
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दुनिया द्वारा की जाने वाली निंदा और उपहास उत्तर: बिना सोचे-समझे किए गए कार्य की असफलता (★)
प्रश्न 3: “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ” पंक्ति द्वारा कौन-सी सलाह दी गई है?
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भविष्य की सफलता के लिए अतीत की गलतियों से सीखने की
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अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की
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अतीत और भविष्य दोनों घटनाओं को समान रूप से याद रखने की
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अतीत और भविष्य दोनों को भूलकर केवल वर्तमान में जीने की उत्तर: अतीत की असफलताओं को भूलकर भविष्य पर ध्यान देने की (★)
प्रश्न 4: “जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ” पंक्ति का क्या अर्थ है?
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हमें कठिनाइयों और चुनौतियों से बचना चाहिए।
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हमें आराम की तलाश करने में मन लगाना चाहिए।
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हमें असंभव और कठिन कार्यों पर ध्यान देना चाहिए।
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हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए। उत्तर: हमें सहज जीवन पर ध्यान देना चाहिए। (★)
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? प्रश्न: आपने ये उत्तर ही क्यों चुने? उत्तर: हमने ये उत्तर इसलिए चुने क्योंकि पहली कुंडलिया में बताया गया है कि बिना सोचे-समझे काम करने से काम खराब होता है और मन दुखी रहता है। दूसरी कुंडलिया में बताया गया है कि पुरानी बातों को भूलकर आगे के बारे में सोचना चाहिए और जो काम आसानी (सहजता) से हो जाए, उसी में मन लगाना चाहिए।
पंक्तियों पर चर्चा (पृष्ठ 75)
प्रश्न: पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया?
(क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय ।।” उत्तर: इसका अर्थ है कि जो व्यक्ति किसी भी काम को बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में करता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। ऐसा करने से उसका अपना काम तो बिगड़ता ही है, साथ ही सारी दुनिया उस पर हँसती है और उसका मजाक उड़ाती है।
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ।।” उत्तर: इसका अर्थ है कि जो बातें बीत गईं या जो गलतियाँ हो गईं, उन्हें भूल जाना चाहिए और अपने आने वाले कल (भविष्य) के बारे में सोचना चाहिए। जो काम आसानी से हो सके, हमें उसी में अपना मन लगाना चाहिए।
मिलकर करें मिलान (पृष्ठ 76)
प्रश्न: नीचे स्तंभ 1 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं, उनसे संबंधित अर्थ वाली स्तंभ 2 की पंक्तियों से उनका मिलान कीजिए-
उत्तर (सही मिलान):
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जग में होत हँसाय चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै ॥ मिलान: -> 2. बिना विचार के किए गए कार्य के कारण मन अशांत रहता है। अच्छा खान-पान, सम्मान या जीवन की खुशियाँ भी उस व्यक्ति को सुख नहीं दे पातीं।
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कह गिरिधर कविराय दुख कछु टरत न टारे। खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे ॥ मिलान: -> 1. जो कार्य बिना विचार किए किया जाता है, वह लंबे समय तक मन में खटकता रहता है और उसकी पीड़ा से छुटकारा पाना मुश्किल होता है।
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ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै। दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै।। मिलान: -> 4. ऐसे कार्य कीजिए कि किसी बुरे व्यक्ति को हँसने का मौका न मिले और मन में किसी प्रकार का दोष या अपराधबोध न हो।
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कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती। आगे को सुख होइ समुझि बीती सो बीती ।। मिलान: -> 3. अपने मन को इस बात पर विश्वास करना सिखाओ कि भविष्य की खुशी को समझते हुए अतीत के दुखों को भुलाकर आगे बढ़ना चाहिए।
सोच-विचार के लिए (पृष्ठ 76)
प्रश्न (क): “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं? उत्तर: बिना विचार किए काम करने से हमारा अपना काम बिगड़ जाता है, दुनिया हमारा मजाक उड़ाती है, हमारे मन को शांति नहीं मिलती और अच्छे खान-पान या खुशी के माहौल में भी हमारा मन नहीं लगता। यह गलती हमेशा हमारे मन में चुभती रहती है।
प्रश्न (ख): “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कुंडलिया में जो बातें सैंकड़ों साल पहले कही गई थीं, क्या वे आपके लिए भी उपयोगी हैं? कैसे? उदाहरण देकर समझाइए। उत्तर: हाँ, ये बातें आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। उदाहरण के लिए- अगर हम बिना सोचे-समझे परीक्षा में जल्दी-जल्दी गलत उत्तर लिख दें, तो बाद में हमें पछताना पड़ता है और हमारे नंबर कम आते हैं। इसलिए हमेशा सोच-समझकर काम करना चाहिए।
प्रश्न (ग): “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै।।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों (सन्मान, राग रंग) के अर्थ शब्दकोश से देखकर लिखिए। प्रत्येक के लिए एक-एक उदाहरण भी दीजिए। उत्तर: * सन्मान (सम्मान): आदर या इज्जत। उदाहरण: अच्छे काम करने पर सबको समाज में सम्मान मिलता है।
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राग रंग: गाना-बजाना, खुशी या उत्सव का माहौल। उदाहरण: दीवाली के त्योहार पर चारों तरफ राग-रंग का माहौल होता है।
अनुमान और कल्पना से (पृष्ठ 77)
प्रश्न (क): कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी बनाइए। उत्तर: मेरे एक मित्र राहुल ने बिना सोचे-समझे अपनी सारी बचत से एक बहुत महँगा वीडियो गेम खरीद लिया। कुछ दिनों बाद जब उसे स्कूल के एक जरूरी प्रोजेक्ट के लिए सामान खरीदना था, तो उसके पास पैसे नहीं बचे। तब उसे बहुत पछतावा हुआ कि उसने बिना सोचे-समझे सारे पैसे खर्च कर दिए और उसका प्रोजेक्ट भी पूरा नहीं हो पाया।
प्रश्न (ख): कल्पना कीजिए कि “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ…।” कविता निम्नलिखित के लिए लिखी गई है। इनकी कौन-कौन सी समस्याएँ होंगी? यह कविता उन्हें कैसे प्रेरित करेगी? (आप, आपका कोई सहपाठी, आपका कोई परिजन, आपके कोई शिक्षक, कोई पक्षी, कोई पशु) उत्तर (सहपाठी के लिए): * समस्या: मेरा एक सहपाठी पिछली परीक्षा में फेल हो गया था और वह इस बात से बहुत उदास और निराश था।
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प्रेरणा: यह कविता उसे प्रेरित करेगी कि पुरानी असफलता पर रोने या दुखी होने से कोई फायदा नहीं है। पुरानी बातों को भूलकर उसे आगे की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए, ताकि वह भविष्य की परीक्षाओं में अच्छे अंक ला सके।
प्रश्न (ग): कल्पना कीजिए कि आप एक ऐसे व्यक्ति से मिले हैं, जो हमेशा बीती बातों में खोया रहता है। आप उसे समझाने के लिए क्या-क्या कहेंगे? उत्तर: मैं उसे समझाऊँगा कि जो समय बीत गया, वह कभी वापस नहीं आ सकता। पुरानी बातों को सोचकर अपना आज खराब करने से कोई फायदा नहीं है। पुरानी बातों को भूलकर आज में जीना चाहिए और अपने आने वाले कल को अच्छा बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
शब्द से जुड़े शब्द (पृष्ठ 77)
प्रश्न: नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में ‘चित्त’ या ‘मन’ से जुड़े शब्द कुंडलियों में से चुनकर लिखिए- उत्तर: कुंडलियों में ‘मन’ या ‘चित्त’ से जुड़े भाव वाले शब्द हैं:
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चैन (शांति)
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परतीती (विश्वास)
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भावै (अच्छा लगना)
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पछिताय (पछताना)
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खटकत (चुभना)
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सुधि (याद)
कविता की रचना (पृष्ठ 78)
प्रश्न (क): पाठ में दी गई दोनों कुंडलियों को ध्यान से देखिए और अपने-अपने समूह में मिलकर इनकी विशेषताओं की सूची बनाइए। उत्तर:
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जो विशेषताएँ दोनों कुंडलियों में हैं: 1. दोनों में कवि का नाम (गिरिधर कविराय) आया है। 2. दोनों कुंडलियों में लयात्मकता है (बोलने में बराबर समय लगता है)। 3. पंक्ति के अंत में तुकबंदी है (जैसे पछिताय-हँसाय, पावै-भावै)।
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जो विशेषताएँ किसी एक कुंडलिया में हैं: 1. पहली कुंडलिया में ‘बिना सोचे काम करने’ के नुकसान बताए गए हैं। 2. दूसरी कुंडलिया में ‘बीती बातों को भूलने’ की सलाह दी गई है।
प्रश्न (ख): कविता की विशेषताओं का सही पंक्तियों से मिलान कीजिए- उत्तर (सही मिलान):
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पंक्ति के अंतिम शब्द की ध्वनि आपस में मिलती-जुलती है। -> 2. ताही में चित देइ बात जोई बनि आवै। / दुर्जन हँसै न कोइ चित्त में खता न पावै।।
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कवि के नाम का उल्लेख किया गया है। -> 1. कह गिरिधर कविराय यहै करु मन परतीती ।।
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एक-दूसरे के विपरीत विचार एक साथ आए हैं। -> 4. बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।
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एक ही वर्ण से शुरू होने वाले एक से अधिक शब्द एक ही पंक्ति में आए हैं। -> 3. बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। (ब-ब)
काल से जुड़े शब्द (पृष्ठ 78-79)
प्रश्न (क) और (ख): नीचे कुछ शब्द दिए गए हैं। इनका प्रयोग करते हुए तीनों प्रकार के ‘काल’ व्यक्त करने वाले तीन-तीन वाक्य बनाइए और उन शब्दों को रेखांकित कीजिए। उत्तर:
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भूतकाल के वाक्य (बीता हुआ समय):
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मैंने कल अपना पाठ याद किया था।
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वह पिछले साल अपने गाँव गया था।
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बीते हुए समय को याद करके मत रोओ।
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वर्तमान काल के वाक्य (चल रहा समय):
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आज बहुत अच्छी धूप निकली है।
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मैं अभी-अभी स्कूल से घर आया हूँ।
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आजकल सब लोग इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं।
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भविष्य काल के वाक्य (आने वाला समय):
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हम अगले महीने छुट्टियाँ मनाने जाएँगे।
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मेरी परीक्षा जल्दी ही शुरू होने वाली है।
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मैं कल अपने दोस्त से मिलने जाऊँगा।
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आपकी बात – पाठ से आगे (पृष्ठ 79)
प्रश्न (क): “खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे।।” का अर्थ है ‘बिना सोचे किए गए कार्य मन में चुभते रहते हैं।’ क्या आपने कभी ऐसा अनुभव किया है? उस घटना को साझा कीजिए। उत्तर: हाँ, एक बार मैंने गुस्से में आकर बिना सोचे-समझे अपने छोटे भाई का खिलौना तोड़ दिया था। बाद में जब वह बहुत रोने लगा, तो मुझे अपनी गलती का एहसास हुआ। मुझे बहुत बुरा लगा और यह बात कई दिनों तक मेरे मन में खटकती रही।
प्रश्न (ख): “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ।” का अर्थ है ‘अतीत को भूलना और भविष्य पर ध्यान देना चाहिए।’ क्या आप इस बात से सहमत हैं? क्यों? उदाहरण देकर समझाइए। उत्तर: हाँ, मैं इस बात से बिल्कुल सहमत हूँ। अगर हम पुरानी बातों को ही सोचते रहेंगे, तो कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे। उदाहरण के लिए, अगर कोई खिलाड़ी खेल में हार जाता है, तो उसे हार का दुख मनाने की जगह अपनी कमियों को सुधारकर अगले खेल की तैयारी करनी चाहिए।
प्रश्न (ग): पाठ में दी गई दोनों कुंडलियों के आधार पर आप अपने जीवन में कौन-कौन से बदलाव लाना चाहेंगे? उत्तर: मैं अपने जीवन में दो बड़े बदलाव लाऊँगा: पहला, मैं कोई भी नया काम या फैसला करने से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करूँगा ताकि बाद में पछताना न पड़े। दूसरा, मैं पुरानी गलतियों या बुरी बातों को भूलकर हमेशा अपने भविष्य को अच्छा बनाने की कोशिश करूँगा।
प्रश्न (घ): “खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै।।” इस पंक्ति में खान-पान, सम्मान और राग-रंग अच्छा न लगने की बात की गई है। आप इसमें से किसे सबसे आवश्यक मानते हैं? अपने उत्तर के कारण भी बताइए। उत्तर: मैं ‘सम्मान’ (इज़्ज़त) को सबसे आवश्यक मानता हूँ। क्योंकि अच्छा खान-पान और राग-रंग (खेल-कूद/खुशी) कुछ समय के लिए होते हैं, लेकिन अगर हमारे अच्छे कामों से समाज में हमारा सम्मान है, तो हम हमेशा गर्व और शांति से जी सकते हैं।
हँसी (पृष्ठ 80)
प्रश्न (क): कभी-कभी लोग दूसरों की गलतियों पर ही नहीं, उनके किसी भी कार्य पर हँस देते हैं। ऐसी कुछ स्थितियों की सूची बनाइए, जब किसी को आप पर या आपको किसी पर हँसी आई हो। उत्तर: 1. जब मैं स्कूल में चलते-चलते फिसल कर गिर गया था, तो मेरे कुछ दोस्त हँसने लगे थे। 2. जब मेरे एक दोस्त ने जल्दबाजी में अपनी शर्ट के बटन उल्टे-सीधे लगा लिए थे, तो मुझे उस पर हँसी आ गई थी।
प्रश्न (ख): ऐसी दोनों स्थितियों में आपको कैसा लगता है और दूसरों को कैसा लगता होगा? उत्तर: जब लोग मुझ पर हँसते हैं, तो मुझे बहुत शर्म आती है और बुरा लगता है। इसी तरह, जब मैं दूसरों पर हँसता हूँ, तो उन्हें भी मेरी तरह ही बहुत बुरा और अपमानित महसूस होता होगा।
प्रश्न (ग): सोचिए कि कोई व्यक्ति आपकी किसी भूल पर हँस रहा है। ऐसे में आप क्या कहेंगे या क्या करेंगे ताकि उसे एहसास हो जाए कि इस बात पर हँसना ठीक नहीं है? उत्तर: मैं उस व्यक्ति से शांत होकर प्यार से कहूँगा कि- “गलतियाँ तो किसी से भी हो सकती हैं। अगर मेरी जगह तुम गिर गए होते या तुमसे यही गलती होती, तो क्या तुम्हें अच्छा लगता कि कोई तुम पर हँसे?”
सोच-समझकर (पृष्ठ 80-81)
प्रश्न (क): आज के समय में कुछ लोग जल्दी में कार्य कर देते हैं या जल्दी में निर्णय ले लेते हैं। कुछ ऐसी स्थितियाँ बताइए जहाँ जल्दबाजी में निर्णय लेना या कार्य करना हानिकारक हो सकता है। उत्तर: 1. सड़क पार करते समय जल्दबाजी करना (दुर्घटना हो सकती है)। 2. परीक्षा में बिना प्रश्न को ठीक से पढ़े जल्दी-जल्दी उत्तर लिखना। 3. गुस्से में आकर जल्दबाजी में किसी को बुरा-भला कह देना। 4. किसी अनजान लिंक पर क्लिक करके फोन में अपनी जानकारी भर देना।
प्रश्न (ख): मान लीजिए कि आपको या आपके किसी परिजन को मोबाइल पर लॉटरी लगने, बैंक खाता बंद होने, या पैसे भेजने के संदिग्ध (धोखाधड़ी वाले) संदेश मिलते हैं। ऐसे में आप क्या करेंगे? उत्तर: ऐसे संदेश मिलने पर मैं कभी भी जल्दबाजी में कोई काम नहीं करूँगा। मैं किसी को भी अपना ओ.टी.पी. (OTP), ए.टी.एम. पिन, बैंक खाते या आधार कार्ड की जानकारी नहीं दूँगा। मैं किसी अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करूँगा और किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे नहीं भेजूँगा। ऐसी धोखाधड़ी की शिकायत मैं तुरंत अपने माता-पिता को बताकर साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर करूँगा।
प्रश्न (ग): नीचे कुछ स्थितियाँ दी गई हैं। इन स्थितियों में बिना सोचे-समझे कार्य करने या निर्णय लेने के क्या परिणाम हो सकते हैं-
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सोशल मीडिया पर झूठा संदेश या असत्य समाचार पर भरोसा करके उसे सबको भेज दिया। उत्तर: इससे पूरे समाज में अफवाहें और डर फैल सकता है, और लोगों के बीच लड़ाई-झगड़े भी हो सकते हैं।
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जल्दबाजी में बिना हेलमेट के बाइक चलाने पर पुलिस ने चालान काट दिया। उत्तर: इससे न सिर्फ पैसे का नुकसान हुआ, बल्कि दुर्घटना होने पर सिर में गंभीर और जानलेवा चोट भी लग सकती थी।
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बिना माता-पिता से पूछे ऑनलाइन गेम पर पैसे खर्च कर दिए। उत्तर: इससे माता-पिता की मेहनत की कमाई बर्बाद हो जाएगी, उन्हें दुख होगा और घर में पैसों की परेशानी भी आ सकती है।
आज की पहेली (पृष्ठ 81-82)
प्रश्न: “खान पान सन्मान” – इस पंक्ति के तीनों शब्दों में केवल एक मात्रा का बार-बार उपयोग किया गया है (आ की मात्रा)। ऐसे ही दो वाक्य नीचे दिए गए हैं- नीली नदी धीमी थी। चींटी चीनी जीम गई। अब आप इसी प्रकार के वाक्य अलग-अलग मात्राओं के लिए बनाइए। (आप एक वाक्य में केवल एक मात्रा को बार-बार या बिना मात्रा वाले शब्दों का ही उपयोग कर सकते हैं।) उत्तर: * ‘उ’ की मात्रा: मुनमुन चुप रह।
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‘ऊ’ की मात्रा: दूर कूप पर घूम।
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‘ए’ की मात्रा: सब बच्चे खेले।
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‘ओ’ की मात्रा: चोर को रोको।